किसी धर्मात्मा को खोज कर लाओ?

धर्म क्या है..?

एक राजा के तीन पुत्र थे। राजा उन तीनों युवराज में से किसी एक को राजा बनाना चाहते थे। 

एक दिन राजा ने तीनों पुत्रों को बुलाया और कहा… “किसी धर्मात्मा को खोज कर लाओ?”

तीनों राजकुमार धर्मात्मा को खोजने निकल पड़े। कुछ समय बाद बड़ा राजकुमार एक मोटे आदमी को लाया। 

उसने राजा से कहा.., “ये सेठजी बहुत ही दानपुण्य करते हैं। इन्होने कई मंदिर, तालाबों का निर्माण कराया है।” 

यह सुनकर राजा ने सेठ का स्वागत किया और धन देकर उन्हें सम्मान पूर्वक विदा कर दिया।

दूसरा राजकुमार एक गरीब ब्राह्मण को लेकर लौटा। 

उसने राजा से कहा.., “इन पंडिजी को चारों वेद और पुराणों का पूरा ज्ञान है। इन्होंने चारों धामों की यात्रा पैदल ही की है। ये तप भी करते हैं और सातसात दिनों तक निर्जल भी रहते हैं इसलिए ये धर्मात्मा हैं।

राजा ने ठीक उस सेठ की तरह ही ब्राह्मण को भी धन का दान देकर सम्मान पूर्वक विदा किया।

आखिर में छोटा राजकुमार आया, वह अपने साथ एक आदमी को लाया। 

राजकुमार ने कहा.., “पिताश्री! यह आदमी सड़क पर घायल पड़े एक श्वान के जख्मों को धो रहा था। जब मैनें इससे पूछा ऐसा करने पर तुम्हें क्या मिलेगा। तो इसने उत्तर दिया, मुझे तो कुछ नहीं मिलेगा हां ये जरूर है कि इस श्वान को आराम मिल जाएगा।

राजा ने उस व्यक्ति से पूछा.., “क्या तुम धर्मकर्म करते हो?” 

आदमी ने कहा..,”मैं अनपढ़ हूं। धर्मकर्म के बारे में कुछ भी नहीं जानता। कोई मांगे तो अन्न दे देता हूं। कोई बीमार हो तो सेवा कर देता हूं।

यह सुनकर राजा ने कहा.., “कुछ पाने की आस रखे बिना दूसरों की सेवा करना ही तो धर्म है। छोटे राजकुमार ने बिल्कुल सही व्यक्ति की तलाश की है।” 

अतः राजा ने अपने तीसरे बेटे को राजा के पद के लिए चुन लिया। इस तरह युवराज कुछ समय बाद राजा बन गया।

      धर्म न शरीर पर धारण किया जाने वाला चिन्ह है, न कर्मकाण्ड है, न दिखावे का वर्ताव है, न सुनाने का ज्ञानधर्म तो मात्र इतना ही है किआपकी सद्भावनाआपके सद्व्यवहार के द्वारा किसी को सुखसंतोष पहुँचाने में बरती जा रही है। 

यह उद्देश्य कभी मात्र चंद मीठे सुखद् शब्दों से पूरा हो जाता है, कभी प्रेम का स्पर्श और कभी अपने हिस्से की चंद रोटियों से भी पूरा हो जाता हैशर्त बस इतनी है कि आपमें सद्भावना कितनी है और आप उसे किस हद तक दूसरों में बाँटते हैं..। 

धर्म की एक शब्द की व्याख्या मात्र सद्द्भावनाही है..

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