क्या आप इंसान हैं या अपने अंदर छिपा रखा है कोई मुखौटा

आत्मविश्लेशन करें, क्या आप इंसान हैं या अपने अंदर छिपा रखा है कोई मुखौटा

बात उस समय की है जब गुलामी की प्रथा प्रचलित थी। यूनान में झांथस नामक एक अत्यंत धनी व्यक्ति रहता था। उसका एक गुलाम थाईसप। एक दिन झांथस ने ईसप से कहा, ‘मुझे हौज पर स्नान करने जाना है। देखकर आओ कि वहां कितने आदमी हैं।’

ईसप हौज पर गया और वहां से लौटकर बोला, ‘हुजूर वहां सिर्फ एक आदमी है।’ 

यह सुनकर झांथस उनके साथ स्नान करने के लिए चल पड़ा। दोनों हौज पर पहुंचे तो वहां भारी भीड़ लगी हुई थी। झांथस ने कहा, ‘तुमने तो कहा था कि हौज पर केवल एक आदमी है लेकिन यहां तो भीड़ लगी हुई है।’

ईसप सिर झुकाकर बोला, ‘हुजूर, मैं तो अब भी कहूंगा कि यहां पर केवल एक आदमी है।’ 

झांथस ने इसका कारण जानना चाहा तो ईसप बोला, ‘हुजूर जब मैं यहां आ रहा था तो रास्ते में एक बहुत भारी पत्थर पड़ा हुआ था। हर आनेजाने वाले को उस पत्थर से चोट लग रही थी लेकिन प्रत्येक व्यक्ति चोट खाकर आगे निकल जाता था। किसी के मन में यह बात नहीं आती थी कि दूसरों को भी इस पत्थर से चोट लगेगी। कोई उसे रास्ते से हटाने की कोशिश नहीं करता था। कुछ देर बाद एक व्यक्ति यहां आया। वह भारी पत्थर को देखकर ठिठका और फिर उसने अपनी पूरी शक्ति व सामर्थ्य लगाकर उस पत्थर को वहां से हटा दिया। बाद में वह हौज की तरफ चला गया। वह अभी भी यहां मौजूद है।’

 ईसप ने कहा, ‘हुजूर यहां इतने लोग हैं लेकिन बेहद स्वार्थी हैं। किसी ने भी यह नहीं सोचा कि जैसे हमें चोट पहुंची है वैसे किसी अन्य को भी पहुंच सकती है। यह विचार सिर्फ एक व्यक्ति के मन में आया। उसने उस पत्थर को न ही पार करने की कोशिश की और न ही उससे चोट खाई। उसने उस पत्थर को हटाना ही अपना फर्ज समझा। मुझे तो सिर्फ वही इंसान नजर आया। इसलिए मैंने आपसे कहा कि हौज पर केवल एक आदमी है।’

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