नजर लगाओगे क्या ?

महरी के दो नन्हें बेटे उसके साथसाथ काम पर जाते हैं। बड़े की उम्र पाँच वर्ष तो छोटे की उम्र तीन वर्ष है। महरी जब तक घरों में काम करती है,बच्चे बाहर या ओसारे में खेलते रहते हैं। अमीर मालकिन का दिया रूखासूखा,बासी रोटी भात खाकर खुश रहते हैं। उस दिन लाख मिन्नतों के बाद मालकिन का बेटा दूध पीने को राजी हुआ था और नाकभौंह चढ़ाए दूध पी रहा था। महरी के बेटे खेलतेखेलते उधर आ निकले। छोटे ने दूध देखा और बड़े से पूछा-‘भैया ये क्या है?’बड़े ने बताया-‘दूध।

-‘दूध मीठा होता है क्या?’-छोटे ने पूछा।

नहीं ..नहीं दवासा कड़वा होता है।बड़े ने समझदारी दिखाई।

-‘छिः,गंदा लड़का है। दवा पीता है। छोटे ने भी अक्लमंदी का परिचय दिया।

उनको दूध की तरफ देखते पाकर मालकिन चिल्लाईजाओ बाहर नजर लगाओगे क्या ? खुद तो घासभूसा भी पचा लेते हो,मेरे बेटे को तो दूध भी नहीं पचता।