तिलक क्यों कर रहे हे?”

एक बार की बात हे जब एक गाव में एक महाराज सत्यनारायण देव की कथा करवा रहे थे…गाव के सभी भाविक भक्त वह कथा का रसपान करने वहा आये हुए थे.

सभी ने मन लगाकर कथा सुनी. कथा जब पूर्ण हो गई तब कथा करने वाले महाराज को नियम अनुसार दक्षिणा और अनाज देने के लिए भक्त कतार में खड़े हो गए.

अब वह अनाज/दक्षिणा देते समय कतार में सबसे आगे एक स्त्री खड़ी थी,

उसने अनाज व दक्षिणा तो दिया साथ में महाराज के ललाट पर कुमकुम तिलक भी किया.और वह करने के बाद वह स्त्री निचे एक पीपल के वृक्ष का पर्ण पड़ा था वहा कुमकुम लगाके चली गई. कतार में सब खड़े थे सबने यह देखा, और एक के बाद एक सभी वही करने लगे.

सब महाराज को तिलक लगाते और निचे पड़े पर्ण पर भी तिलक करते.

ऐसा उन सभी लोगो ने किया जो कतार में खड़े थे. महाराज अपने दक्षिणा बटोरने में व्यस्त थे.

लेकिन वहा एक सज्जन युवान वह सब देख रहा था…

उसे प्रश्न हुआ की “सब महाराज को तिलक कर रहे हे वहा तक तो ठीक हे, लेकिन निचे पड़े पर्ण पर सब तिलक क्यों कर रहे हे?”

उसने यह प्रश्न सभी से पूछा सब का एक ही उत्तर था “आगे वाला कर रहा हे इस लिए”

तब वह युवान सबसे पहले जो स्त्री खड़ी थी उसके घर गया क्योकि अब तक वो घर जा चुकी थी.

वहा पोह्चने के बाद वह युवक ने वह स्त्री से पूछा “आपने वह पीपल के पर्ण पर तिलक क्यों किया?”

स्त्री ने कहा… “केसा तिलक? मेने तो वहा मेरा जो कुमकुम वाला हाथ था उसको पोछने के लिए वह पर्ण का उपयोग किया…”

वह युवक जोरजोर से हसने लगा लोगो की मूर्खता पर और अपने घर चल दिया…

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मित्रों इसे कहा जाता हे अंधानुकरण….

आज यह सार्वत्रिक देखने को मिल रहा हे.

चाहे वह सामजिक क्षेत्र हो, राजनीति, अर्थकारण, शिक्षण या आध्यात्म.

हर जगह पर मात्र अंधानुकरण.

सबसे ज्यादा यह आध्यात्म और धर्म में आज छुपा हुआ हे.

हमारा वैदिक धर्म सत्य और विज्ञान की नीव पर खड़ा हे.

प्रत्येक कृति के पीछे तर्क और विज्ञान आवश्यक हे.

Intellectual Love towards God… भगवान, आध्यात्म और धर्म के प्रति बौधिक प्रेम निर्माण होना चाहिए.

अंधानुकरण हमें निश्चित ही अधःपतन की दिशा में गतिशील करता हे.

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