संगत का असर

एक संत अपने शिष्यों के साथ जंगल से कहीं जा रहे थे । शाम की प्रार्थना का समय हुआ । झरने के पानी से हाथ धो करके शिष्यों ने चादर बिछाई । प्रार्थना करनी शुरु ही की थी कि अचानक गर्जना करता हुआ एक शेर दूर से दिखाई दिया । उसे देखकर शिष्य भयभीत हो गए । वे दौडकर वृक्ष पर चढ गए । शेर नजदीक आता गया, पेड पर बैठे शिष्यों के मन में घबराहट बढती गई । पर जैसे शेर आया वैसे ही चला गया।

संत प्रार्थना में इतने लीन रहे कि उन्होंने शेर को देखा तक नहीं । शेर ने भी उन्हें नहीं देखा । शिष्य वापस वृक्ष से नीचे उतरे और प्रार्थना में बैठे । प्रार्थना पूरी होते ही चादर उठाकर वे आगे जाने लगे।

अचानक एक मच्छर संत की नाक पर आकर बैठा । मच्छर ने काटा । संत चीख उठे । वे उस वेदना को सहन नहीं कर सके।

एक शिष्य बोला संतवर ! यह क्या बात है ? शेर पास से गुजर कर चला गया, तब तो आपने नजर उठाकर देखा तक नहीं और इस तुच्छ मच्छर ने थोडासा काटा तो इस थोडीसी वेदना को भी सहन नहीं कर सके,चीख उठे । यह क्या बात है ?

संत ने बहुत ही गहरा उत्तर देते हुए कहा – ‘वत्स ! उस समय मैं ईश्वर के साथ था और इस समय मैं मनुष्यों के साथ हूं।

? इसलिए कहा गया है जिस प्रकार के संग में हम रहते हैं उस संग का प्रभाव हमारे ऊपर अवश्य होता है।

इसलिए हमेशा श्रेष्ठ व महापुरुषों के संग में ही रहना चाहिए जिससे हमारा जीवन भी श्रेष्ठ संग के रंग में रंग जाए।

ओम शान्ति❤

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