Hindi

  • जो निःशुल्क है, वही सबसे ज्यादा कीमती है.. नींद , शांति , आनन्द , हवा* , *पानी , प्रकाश* और सबसे ज्यादा हमारी *सांसे*….!!
  • कुछ भी कर्म करो हमेशा एक बात ध्यान रखो की परमात्मा हमेशा ऑनलाइनहै।

    जैसे

    आकाश में तारे नही गिने जा सकते 

    जंगल में पेड़ नही गिने जा सकते 

    समुन्दर की गहराई नही  नापी जा सकती 

    आकाश की ऊँचाई नही मापी जा सकती 

    इसी तरह परमात्मा द्वारा हम पे किये गये

    उपकार नही गिने जा सकते।

 

  • मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक
    कविता लिखना चाहता हूँ।
    चिड़िया नें मुझ से पूछा, ‘तुम्हारे शब्दों में
    मेरे परों की रंगीनी है?’
    मैंने कहा, ‘नहीं’।
    … ‘तुम्हारे शब्दों में मेरे कंठ का संगीत है?’
    ‘नहीं।’
    ‘तुम्हारे शब्दों में मेरे डैने की उड़ान है?’
    ‘नहीं।’
    ‘जान है?’
    ‘नहीं।’
    ‘तब तुम मुझ पर कविता क्या लिखोगे?’
    मैनें कहा, ‘पर तुमसे मुझे प्यार है’
    चिड़िया बोली, ‘प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?’
    एक अनुभव हुआ नया।
    मैं मौन हो गया!
    – हरिवंशराय बच्चन –

 

  • वृक्ष हो भले घने , हो घने हो बड़े ,
    एक पट छाव की मांग मत , मांग मत ,
    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ .तू न थकेगा कभी , तू न थमेगा कभी , तू न मुड़ेगा कभी ,
    कर शपथ , कर शपथ , कर शपथ ,
    अग्निपथ , अग्निपथ , अग्निपथ .

 

  • ये भी एक दुआ है खुदा से,
    किसी का दिल न दुखी मेरी वज़ह से…….ए खुदा कर दे कुछ ऎसी इनायत मुझ पे,
    की खुशियाँ ही मिले सब को मेरी वज़ह से……….

 

  • तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूं कर होगा
    जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
    वो कितना सुन्दर होगा

    तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
    ज्यों तुलसी के बिरवा को हर आंगन तरसा करता है
    हर आंगन तरसा करता है
    अपना रूप दिखाने को … हो हो ओ हो
    अपना रूप दिखाने को तेरे रूप में खुद ईश्वर होगा
    जिसकी रचना …

    रूप रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
    मेरे प्यासे मन में यूं उतरी ज्यों रेत में झरना पानी का
    ज्यों रेत में झरना पानी
    रोम रोम तेरा रस की गंगा … हो हो ओ हो
    रोम रोम तेरा रस की गंगा रूप का वो सागर होगा
    जिसकी रचना …

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